भारतीय अंटार्कटिका बिल 2022
हाल ही में संसद में भारतीय अंटार्कटिका बिल2022 पेश किया गया जिससे संसद द्वारा पास कर दिया गया है। यह बिल अंटार्कटिका संधि, अंटार्कटिका समुद्री जीव संसाधन संबंधी कनवेंशन और अंटार्कटिका संधि के लिए पर्यावरणीय संरक्षण पर प्रोटोकॉल को प्रभावी बनाने का प्रयास करेगा।
इस बिल के जरिए केंद्र सरकार एक अंटार्कटिका शासन और पर्यावरणीय संरक्षण समिति बनाएगी जिसके अध्यक्ष पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव होंगे।अंटार्कटिका में भारतीय अभियानों पर अंतरराष्ट्रीय कानून चलता था लेकिन इस बिल के आ जाने के बाद अंटार्कटिका में भारतीय मिशन पर गए लोगों की किसी गलती, अनियमितता, अपराध जैसी चीजों पर भारत की अदालतों में ही फैसला होगा और भारत के ही कानून लागू होंगे।
इस बिल के तहत, अंटार्कटिका में खुदाई, ड्रेजिंग, उत्खनन या खनिज संसाधनों के संग्रह पर पूरी तरह से रोक होगी। लेकिन अनुमति लेने के बाद ये चीजें सिर्फ वैज्ञानिक शोध के लिए की जा सकेंगी।
इस बिल के अनुसार यहां के पौधों, पशु-पक्षियों और सील मछलियों को किसी तरह का नुकसान पहुंचाना,फायरआर्म्स का इस्तेमाल करने रोक है।
अंटार्कटिका पृथ्वी का इकलौता महाद्वीप है जहाँ कोई मनुष्य मूल रूप से नहीं रहता था। अंटार्कटिक महाद्वीप को केवल वैज्ञानिक अनुसंधान के लिये संरक्षित करने एवं असैन्यीकृत क्षेत्र बनाने के लिये 1 दिसंबर, 1959 को वाशिंगटन में 12 देशों के बीच अंटार्कटिक संधि पर हस्ताक्षर किया। यह संधि वर्ष 1961 में लागू हुई और अब तक इसमें 54 देश शामिल हो गए है। वर्ष 1983 में भारत इस संधि का सदस्य बना।अंटार्कटिक संधि का मुख्यालय ब्यूनस आयर्स, अर्जेंटीना में है।
अंटार्कटिक सन्धि में दो प्रकार के सदस्य देश हैं 1.परामर्शी और 2.अपरामर्शी। जब हर साल अंटार्कटिक सन्धि परामर्श बैठक होती है तो परामर्शी देशों को प्रस्तावों पर वोट देने का अधिकार होता है लेकिन अपरामर्शी सदस्यों को यह अधिकार नहीं होता। परामर्शी सदस्य बनने के लिये किसी देश को यह दिखाना होता है कि वह अंटार्कटिका में अनुसंधान करने में सक्रीय है। इस सक्रीयता का एक पहलू अंटार्कटिका में अनुसंधान केन्द्र स्थापित करना होता है जहाँ उस देश के वैज्ञानिक दस्ते रहकर काम कर सकें। भारत अन्य परामर्शी सदस्य देश है।
भारत के द्वारा यहां पर तीन अनुसंधान केंद्र दक्षिण गंगोत्री, मैत्री, भारती विकसित किए गए हैं। दक्षिण गंगोत्री पहला भारतीय वैज्ञानिक अनुसंधान बेस स्टेशन था। जो अभी क्षतिग्रस्त हो गया है। 1989 में भारत का दूसरा स्थायी अनुसंधान केंद्र मैत्री को स्थापित किया गया था। मैत्री के आसपास मीठे पानी की एक झील बनाई गई है जिसे प्रियदर्शिनी के नाम से जाना जाता है। 2012 में भारत का तीसरा व नवीनतम अनुसंधान केंद्र भारती को स्थापित किया गया। भारत ने अभी तक 40 वैज्ञानिक अभियानों को पूरा किया है।
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