भारतीय नोटों पर कलाम व टैगोर की फोटो & रुपए की शुरुआत

भारत में रुपया शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम शेरशाह सूरी ने अपने शासनकाल 1540 से 1545 के दौरान किया था।सर्वप्रथम चांदी का सिक्का चलाया इसका वजन 178 ग्रेन (करीबन 11.534 ग्राम) था। उस समय तांबे के सिक्के को दाम और सोने के सिक्के को मोहर कहते थे। शेरशाह सूरी के शासनकाल में चलाया गया रुपया आज तक प्रचलन में है तथा भारत में ब्रिटिश राज के दौरान भी यह प्रचलन में रहा था। पहला करेंसी नोट 1770 में 'बैंक ऑफ हिन्दुस्तान' जो की एक निजी बैंक था सबसे पहले बैंक नोट के रूप में जारी किया था। इसके बाद 1770 से 1935 के बीच कई निजी बैंकों ने बैंक नोट जारी किए थे।

            अमेरिकी डॉलर, ब्रिटिश पाउंड, जापानी येन और यूरोपीय संघ के यूरो के बाद रुपया पांचवीं ऐसी मुद्रा है, जिसे उसके प्रतीक-चिह्न् (र्) से पहचाना जाता है। भारत में रुपये (₹) के प्रतीक चिन्ह को वित्त मंत्रालय ने 26 अगस्त 2010 को स्वीकृति दी। डी. उदय कुमार ने इस डिजाइन को बनाया था।

        भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 1938 में पहली बार 5 रुपये का नोट जारी किया था, जिस पर King George VI की फोटो छपी हुई थी। आजादी के बाद पहली बार जब साल 1949 में भारत ने नोट छापे तो जॉर्ज VI की तस्वीर हटाकर भारतीय नोटों पर राष्ट्रीय चिन्ह अशोक स्तंभ की तस्वीर छापी गई थी।   

      रिजर्व बैंक ने पहली बार गांधी जी की तस्वीर वाले स्मरण के तौर पर 100 रुपये के नोट 1969 में पेश किए यह साल उनका जन्म शताब्दी वर्ष था। गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 में हुआ था। गांधी जी की मौजूदा पोर्ट्रेट वाले करेंसी नोट पहली बार 1987 में आए थे। सबसे पहले 500 रुपये का नोट अक्टूबर 1987 में पेश किया गया। RBI ने 1996 में एडिशनल फीचर्स के साथ नई महात्मा गांधी सीरीज नोटों को पेश किया। 1996 से ही महात्मा गांधी की तस्वीर वाले जो नए नोट चलन में आए उनमें 5, 10, 20, 100, 500 और 1000 रुपये वाले नोट शामिल थे। 8 नवंबर 2016 को ₹ 500 और ₹ 1000 बैंकनोटों की बंदी के बाद भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 10 नवंबर 2016 से 2000 का नया नोट जारी किया। यह बैंकनोट महात्मा गांधी की नई श्रृंखला का हिस्सा है।

      हाल ही में खबर निकल कर आई है की आरबीआई और सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मीटिंग कार्पोरेशन ऑफ इंडिया (SPMCIL) ने आईआईटी-दिल्ली के एमेरिटस प्रोफेसर दिलीप T शाहनी को गांधी, टैगोर और कलाम वॉटरमार्क के नमूनों के दो अलग-अलग सेट भेजे हैं। साहनी को दो सेटों में से चुनने और उन्हें सरकार द्वारा अंतिम विचार के लिए पेश करने के लिए कहा गया है। उन्हें इस साल जनवरी में मोदी सरकार द्वारा इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंस्ट्रुमेंटेशन के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। मेरा कहने का तात्पर्य यह है कि अब नोटों पर देश के 11वें राष्ट्रपति मिसाइल मैन डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम और रवीन्द्रनाथ टैगोर की फोटो देखने को मिल सकती है। हा सही सुना आपने अब आपको महात्मा गाँधी की फोटो वाले नोटों के साथ ही टैगोर और कलाम की फोटो वाले नोट भी देखने को मिल सकते हैं। "द न्यू इंडियन एक्सप्रेस" की एक रिपोर्ट के अनुसार वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) कुछ बैंक नोटों की एक श्रृंखला पर कलाम और टैगोर के वॉटरमार्क का इस्तेमाल करने पर विचार कर रहा है।

     यह भारत में नही अपितु अमेरिका में भी विभिन्न मूल्यवर्ग के डॉलर्स में जॉर्ज वाशिंगटन, बेंजामिन फ्रैंकलिन, थॉमस जेफरसन, एंड्रयू जैक्सन, अलेक्जेंडर हैमिल्टन और अब्राहम लिंकन सहित कुछ राष्ट्रपतियों के चित्र हैं।

   साल 2017 में, कोलकाता के ही निवासी पृथ्वी दासगुप्ता ने हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी कि 'देश में मुद्रा नोटों में नेताजी सुभाष चंद्र बोस या किसी अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों की तस्वीरें क्यों नहीं हो सकती हैं' इसे लेकर कोलकाता हाई कोर्ट ने केंद्र और भारतीय रिजर्व बैंक को आठ हफ्तों के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया था।

          अब देखना होगा कि आगे क्या होता है...!!!

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